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Wednesday, February 25, 2026

ग़ाज़ा में तबाही पर संयुक्त राष्ट्र का सख्त रुख

ग़ाज़ा पर इज़राइल की ताज़ा बमबारी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” करार देते हुए चेतावनी दी कि इज़राइल बार-बार युद्ध अपराध कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के सामने जवाबदेह होगा। तुर्क का कहना है कि ग़ाज़ा की तबाही ने पूरी दुनिया की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और अब समय आ गया है कि इस “खूनी खेल” को रोका जाए।

इसी बीच, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ग़ाज़ा सिटी के फ़िलिस्तीनियों को खुली धमकी दी है – “तुरंत शहर खाली करो, वरना अंजाम भुगतो।” सेना ने बाकायदा नक्शे जारी कर लोगों को चेताया कि जो लोग जामाल अब्देल नासेर स्ट्रीट और उसके आसपास रुकेंगे, उन्हें मौत का सामना करना पड़ेगा।

ग़ाज़ा में तबाही का मंजर

फ़िलिस्तीनी सिविल डिफ़ेंस के अनुसार, रविवार से अब तक 50 से ज़्यादा इमारतें पूरी तरह जमींदोज़ हो चुकी हैं और 100 से अधिक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। बचाव दलों का कहना है कि तुफ्फाह और अज़-ज़रक़ा इलाकों में मलबे से लगातार शव निकाले जा रहे हैं। कई मस्जिदें और खेल मैदान भी निशाना बनाए गए।

अल जज़ीरा के संवाददाता हानी महमूद ने बताया कि ग़ाज़ा की ऊँची इमारतों को एक-एक कर गिरते देखना बेहद दर्दनाक है, क्योंकि इन इमारतों के साथ वहां की रोज़मर्रा की ज़रूरतें और जीवन भी बिखर जाता है।

अस्पतालों की स्थिति और बढ़ती मौतें

स्थानीय अस्पतालों ने पुष्टि की है कि सोमवार को ही 52 फ़िलिस्तीनी मारे गए, जिनमें 32 सिर्फ ग़ाज़ा सिटी से थे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भूख और कुपोषण से मरने वाले 6 और लोगों की जानकारी दी, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। इज़राइली हमलों में फ़िलिस्तीनी पत्रकार उसामा बलूशा की मौत ने मीडिया समुदाय को और झकझोर दिया।

फ़िलिस्तीनी अधिकारियों का दावा है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 250 पत्रकार मारे गए हैं, और सभी स्थानीय थे, क्योंकि विदेशी मीडिया को ग़ाज़ा में प्रवेश की इजाज़त नहीं है।

मानवीय संकट और विवादित “सुरक्षित क्षेत्र”

इज़राइल ने लोगों को दक्षिण ग़ाज़ा के अल-मावासी इलाके में जाने को कहा है, जिसे वह “मानवीय क्षेत्र” बताता है। लेकिन हकीकत यह है कि उसी जगह पर कई बार बमबारी हो चुकी है। कभी जहां 1.15 लाख लोग रहते थे, अब वहीं 8 लाख से ज़्यादा विस्थापित शरणार्थी भीड़भाड़ वाले टेंटों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

स्पेन का बड़ा ऐलान

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इज़राइल पर कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब कोई भी जहाज़ या विमान, जो इज़राइल के लिए हथियार लेकर जाएगा, स्पेन के बंदरगाहों और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। इसके अलावा, फ़िलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता बढ़ाई जाएगी और अवैध बस्तियों से आने वाले सामानों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। सांचेज़ ने साफ कहा कि नरसंहार में शामिल किसी भी व्यक्ति को स्पेन में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

अमेरिका की मध्यस्थता और हमास का जवाब

वहीं, अमेरिका ने हमास को युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए नया प्रस्ताव दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “आख़िरी चेतावनी” बताया। लेकिन हमास ने इस शर्त को जाल करार देते हुए कहा कि यह इज़राइल को समय और नियंत्रण का अधिकार देता है।

वेस्ट बैंक में भी खूनखराबा

जंग की आग अब कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक तक फैल गई है। एक हमले में फ़िलिस्तीनी बंदूकधारियों ने 6 लोगों की हत्या कर दी। जवाबी कार्रवाई में इज़राइली सैनिकों ने हमलावरों को मार गिराया और कई गांवों में छापेमारी शुरू कर दी। जेनिन में इज़राइली छापे के दौरान 14 साल के दो फ़िलिस्तीनी किशोरों की भी मौत हो गई।

फ़िलिस्तीनी नेता मुस्तफ़ा बरघूती ने आरोप लगाया कि इज़राइल हर छोटे हमले को बहाना बनाकर सामूहिक सज़ा देता है, जबकि उसका असली मक़सद वेस्ट बैंक पर कब्ज़ा और वहां की आबादी को उजाड़ना है।

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