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Wednesday, February 25, 2026

अलीगढ़ में अवैध हथियारों की गुप्त फैक्ट्री का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

अलीगढ़: दिल्ली पुलिस की सराय रोहिल्ला थाना टीम ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक गुप्त अवैध हथियार फैक्ट्री का पर्दाफाश कर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक सामान्य शिकायत से शुरू हुई, जो धीरे-धीरे एक बड़े आपराधिक नेटवर्क की परतें उजागर करती चली गई। इस मामले ने न केवल स्थानीय पुलिस, बल्कि पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।

मामले की शुरुआत: एक गोलीकांड से खुला राज

यह घटनाक्रम 11-12 अगस्त 2025 की रात दिल्ली के चूना भट्टी इलाके में दर्ज एक शिकायत से शुरू हुआ। एक महिला ने पुलिस को बताया कि उसके भाई शुभम उर्फ लाला पर एक नाबालिग ने गोली चलाई थी। मौके पर मौजूद एक पड़ोसी ने तुरंत हिम्मत दिखाते हुए आरोपी से पिस्तौल छीन ली, लेकिन नाबालिग मौके से फरार हो गया। अगले ही दिन, 12 अगस्त को, पुलिस ने 16 वर्षीय नाबालिग को धर दबोचा। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि भगवान गणेश की मूर्ति खरीदने को लेकर हुए विवाद में उसने शुभम पर गोली चलाई थी। उसके पास से एक देसी पिस्तौल और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ।

नाबालिग ने यह भी बताया कि उसने यह हथियार अलीगढ़ से खरीदा था। इस सूचना ने पुलिस को एक बड़े अवैध हथियार नेटवर्क की ओर ले गई।

पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई

इंस्पेक्टर विकास राणा और एसीपी अनिल शर्मा के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस की टीम ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। 27 अगस्त को अलीगढ़ के गंगा गढ़ी गांव से बंटी को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में बंटी ने कबूल किया कि उसने हथियार मथुरा के बिजेंद्र सिंह से खरीदे थे। इसके बाद 30 अगस्त को बिजेंद्र को भी हिरासत में लिया गया। बिजेंद्र के मोबाइल फोन में 70 से अधिक अवैध हथियार बनाने के वीडियो मिले, जिसने पुलिस को इस नेटवर्क की गहराई का अंदाजा दिया।

बिजेंद्र ने पूछताछ में अलीगढ़ के हनवीर उर्फ हन्नू का नाम लिया, जो इस अवैध हथियार फैक्ट्री का मास्टरमाइंड था। 1 सितंबर को पुलिस ने जट्टारी पिशावा रोड पर एक खेत में बने दो कमरों पर छापा मारा। वहां का दृश्य देखकर पुलिस भी हैरान रह गई।

खेत के बीच छिपा काला कारोबार

छापेमारी में पुलिस ने खेत के बीच बने दो कमरों में चल रही अवैध हथियार फैक्ट्री का खुलासा किया। यहां भारी मात्रा में हथियार और उनका कच्चा माल बरामद हुआ। मौके से हनवीर को गिरफ्तार किया गया, जिसने स्वीकार किया कि वह पिछले 15-20 वर्षों से अवैध हथियार बनाने और बेचने के धंधे में शामिल है। उसने अब तक 1200 से अधिक हथियार बेचने की बात कबूल की।

पुलिस ने मौके से 6 देसी पिस्तौल, 12 अधबनी पिस्तौल, 6 जिंदा कारतूस, 5 खाली कारतूस, 13 बैरल, 44 छोटे बैरल, 12 छोटे बैरल पाइप, 3 बड़े बैरल पाइप और हथियार बनाने की मशीनें बरामद कीं। यह बरामदगी इस बात का सबूत है कि यह फैक्ट्री लंबे समय से बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन कर रही थी।

आगे की जांच और नेटवर्क की तलाश

पुलिस के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों—विजय कुमार उर्फ बंटी, बिजेंद्र सिंह और हनवीर उर्फ हन्नू—के आपराधिक रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। साथ ही, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश भी जारी है। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल अलीगढ़ और मथुरा तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके तार अन्य शहरों और राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।

यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया का परिणाम है, जिसने न केवल एक बड़े अवैध हथियार नेटवर्क का पर्दाफाश किया, बल्कि समाज में फैल रहे अपराध को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मामले ने एक बार फिर अवैध हथियारों के कारोबार पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए दिन-रात काम कर रही है, ताकि इस तरह के काले कारोबार को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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