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Wednesday, February 25, 2026

दुष्कर्म पीड़िता से आरोपी की शादी, जातिगत बाधा के बावजूद सात फेरे

लोधा : ग्रामीण इलाके में दुष्कर्म की घटना ने सामाजिक और कानूनी विवाद को जन्म दिया, जहां पारंपरिक पंचायती व्यवस्था ने अप्रत्याशित मोड़ लिया। सूत्रों के अनुसार, थाना क्षेत्र के एक गांव में रविवार को एक युवक द्वारा एक युवती के साथ कथित दुष्कर्म की जानकारी मिलते ही उसके परिजनों ने तुरंत स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, पुलिस कार्रवाई से पूर्व ही ग्रामीणों ने हस्तक्षेप करते हुए पीड़िता के परिवार को वापस गांव ले आए और एक अनौपचारिक पंचायत बुलाई।

इस पंचायत में चुनिंदा सदस्यों की उपस्थिति में दोनों पक्षों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। आरोपी युवक पर तत्काल मुकदमा दर्ज करने के बजाय, पंचायत ने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे प्रारंभिक रूप से युवक के पिता ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने अपनी उच्च जाति का हवाला देते हुए अंतरजातीय विवाह से इनकार किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पीड़िता के परिजन दोबारा थाने की ओर बढ़े, लेकिन पंचों ने मध्यस्थता की और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर सहमति के लिए राजी किया।

मंगलवार की देर शाम तक चले इस विवाद के समापन के रूप में, दोनों पक्षों ने एक स्थानीय मंदिर में विवाह का निर्णय लिया। रात्रि में पंडित को बुलाकर सात फेरे कराए गए, जिसके बाद युवती ने स्पष्ट रूप से आरोपी युवक के साथ रहने की इच्छा जाहिर की। इसके तुरंत बाद दोनों परिवार थाने पहुंचे, जहां उन्होंने विवाह की सूचना दी और कोई आगे की कानूनी कार्रवाई न करने का अनुरोध किया।

यह घटना ग्रामीण भारत में पंचायती न्याय व्यवस्था की भूमिका पर सवाल खड़े करती है, जहां जातिगत पूर्वाग्रह और सामाजिक दबाव कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कानूनी हस्तक्षेप आवश्यक है।

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