इगलास। अलीगढ़ के इगलास में शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन, सोमवार को प्रातःकालीन घड़ी के आठवें पहर से कस्बे के गोंडा मार्ग पर बसे प्राचीन पथवारी मंदिर से एक विशाल कलश यात्रा का आगाज हुआ। पीले वस्त्रों से सुसज्जित और माता की लाल चुनरी से आच्छादित सैकड़ों महिला भक्तों ने सिर पर 11 सौ पवित्र कलश थामे नंगे पांवों की पदयात्रा में हिस्सा लिया। बैंड-बाजों की मधुर धुनों पर भक्ति की लहरें चारों ओर व्याप्त हो गईं, जबकि ‘जय माता दी’ के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। इस भव्य आयोजन ने स्थानीय निवासियों को गहन आध्यात्मिक आनंद प्रदान किया।
यात्रा की शुरुआत धार्मिक विधियों से हुई। मंदिर परिसर में सर्वप्रथम विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की गई, उसके पश्चात पंडित मयंक उपाध्याय ने माता रानी की विधि-विधान से आराधना संपन्न कराई। इसके बाद विधायक राजकुमार सहयोगी ने जिला पंचायत सदस्य बंटी चौधरी के सहयोग से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर प्रस्थान कराया। सबसे रोचक दृश्य तब उभरा जब यात्रा के अग्रभाग में मां का पवित्र ध्वज थामे डोला के साथ लांगुरिया आगे बढ़े, तथा उनके पीछे चुनरी ओढ़े महिलाएं मइया के गुणगान में लीन होकर कलशों को सिर पर संभाले चलीं। मार्ग अवरुद्ध होने के बजाय, जगह-जगह पुष्पों की वर्षा से यात्रियों का स्वागत किया गया, जो इस उत्सव की भव्यता को और निखार गया।
शोभा यात्रा के मध्य भाग में नरसिंह भगवान की मनमोहक झांकी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसी क्रम में गार्गी विद्यालय की बालिकाओं ने चौराहे पर आयोजित डांडिया नृत्य के माध्यम से उत्सव का रंग-बिरंगा स्वरूप प्रदर्शित किया, जो दर्शकों के लिए प्रमुख आकर्षण सिद्ध हुआ। भक्तों ने ‘चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है’, ‘द्वारे चलिए मैया के द्वारे चलिए’ तथा ‘मां की हर बात निराली है’ जैसे भजनों पर नृत्य करते हुए अपनी भक्ति भावना को अभिव्यक्त किया। यात्रा का समापन पथवारी मंदिर से प्रारंभ होकर पुरानी तहसील रोड तथा मथुरा रोड होते हुए पुनः मंदिर पहुंचने पर संपन्न हुआ।
इस अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की नगर इकाई ने अपनी छात्र गतिविधि के तहत विद्यार्थी सेवा शिविर का संचालन किया। विशाल कलश यात्रा के दौरान अभाविप के स्वयंसेवकों ने केले, पानी तथा श्रमदान जैसी सेवाएं प्रदान कर यात्रियों की प्यास बुझाई। जिला सह-संयोजक विपिन उपाध्याय, जिला संयोजक मनीष प्रजापति, जिला सह-संयोजक लोकेश उपाध्याय, सौरव पचौरी, गोपाल उपाध्याय तथा अन्य नगर इकाई सदस्यों ने सक्रिय रूप से भागीदारी निभाई। यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्साह को दर्शाता है, बल्कि सामुदायिक सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है।
