जवां: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के जवां ब्लॉक में स्थित तालिबनगर के एक प्राथमिक जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक-छात्र के रिश्ते को तार-तार करने वाली घटना सामने आई है। स्कूल के हेडमास्टर शकील अहमद पर सातवीं कक्षा की 11 वर्षीय छात्रा के साथ छेड़छाड़ और अश्लील व्यवहार का संगीन आरोप लगा है। इस घटना ने न केवल स्थानीय समुदाय को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि शिक्षा के मंदिर में मानवता के प्रति विश्वास को भी झकझोर दिया है।
मां की सजगता से खुला राज़
पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी पिछले कुछ समय से सहमी और चुपचाप रहने लगी थी। उसका व्यवहार बदला हुआ था और वह स्कूल जाने से कतराने लगी थी। 23 अगस्त 2025 की शाम को जब बेटी रोते हुए घर लौटी, तो मां ने प्यार से उससे बात की। बच्ची ने डरते-डरते बताया कि हेडमास्टर शकील अहमद ने उसके साथ कई बार अश्लील हरकतें कीं। उसने यह भी खुलासा किया कि आरोपी ने उसके निजी अंगों को छुआ और धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया, तो वह उसे परीक्षा में फेल कर देगा। इतना ही नहीं, हेडमास्टर ने बच्ची से यह तक कहा कि वह उससे निकाह करना चाहता है। इस घिनौने कृत्य ने मासूम के मन पर गहरा आघात पहुंचाया।
पुलिस और प्रशासन का त्वरित एक्शन
घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता की मां ने थाना गोधा में हेडमास्टर के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज की। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आरोपी हेडमास्टर को निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा, “यह घटना अत्यंत निंदनीय है। हमने मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं। जांच के नतीजों के आधार पर आरोपी की सेवा समाप्ति सहित अन्य कठोर कदम उठाए जाएंगे।”
समुदाय में आक्रोश, स्कूलों में सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में गुस्से की लहर पैदा कर दी है। अभिभावकों और ग्रामीणों ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम अपने बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन अगर यही शिक्षक उनके साथ ऐसा व्यवहार करेंगे, तो हम उन पर भरोसा कैसे करें?” कई अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूलों में महिला शिक्षकों की नियुक्ति बढ़ाई जाए और बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं।
एक कदम आगे: बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी
यह घटना एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में यौन उत्पीड़न के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षकों की पृष्ठभूमि की जांच और बच्चों को गुड टच-बैड टच की शिक्षा देना बेहद जरूरी है। साथ ही, अभिभावकों को अपने बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं का समय रहते पता चल सके।
इस मामले ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। समाज और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रेरणादायक स्थान बने रहें।
