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Wednesday, February 25, 2026

50 साल बाद तलाक: बुजुर्ग दंपती की अनोखी कहानी

उत्तर प्रदेश : राजधानी लखनऊ से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां 50 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते का अंत तलाक के रूप में हुआ। यह कहानी है 71 वर्षीय गुरुप्रसाद और उनकी 65 वर्षीय पत्नी रमदेई की, जिनका विवाह 1975 में हुआ था। छोटी-मोटी अनबन से शुरू हुआ यह विवाद इतना बढ़ा कि दोनों 1990 से अलग-अलग रहने लगे और अंततः 2009 में यह मामला पारिवारिक न्यायालय तक पहुंचा। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, 26 मार्च 2025 को अपर प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का फैसला सुनाया।

विवाह के बाद शुरू हुई अनबन

लखनऊ के काकोरी क्षेत्र के कटौली गांव के रहने वाले गुरुप्रसाद और मलिहाबाद के ईशापुर गांव की रमदेई का विवाह 1975 में धूमधाम से हुआ था। शुरुआती कुछ साल तो सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे छोटी-छोटी बातों पर दोनों के बीच तकरार शुरू हो गई। 14 साल तक साथ रहने के बावजूद, दंपती को कोई संतान नहीं हुई, जिसने उनके रिश्ते में और तनाव पैदा किया। 1990 तक आते-आते विवाद इतना बढ़ गया कि रमदेई अपने मायके चली गईं और दोनों अलग-अलग रहने लगे।

लंबी कानूनी लड़ाई और तलाक का फैसला

1990 में अलग होने के बाद, दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा। यह विवाद 2009 में पारिवारिक न्यायालय पहुंचा, जहां दोनों पक्षों को समझाने और सुलह कराने की कोशिश की गई। हालांकि, सभी प्रयास नाकाम रहे। गुरुप्रसाद का दावा है कि उन्होंने कई बार रमदेई को साथ रहने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन रमदेई की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। दूसरी ओर, रमदेई और उनके भाई बालकराम का कहना है कि गुरुप्रसाद ने 1990 के बाद कभी भी साथ रहने की पेशकश नहीं की।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 26 मार्च 2025 को तलाक का अंतिम फैसला सुनाया। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि शादी के 50 साल बाद तलाक का यह दुर्लभ उदाहरण है। आमतौर पर वैवाहिक विवाद शादी के शुरुआती कुछ वर्षों में ही सामने आते हैं, लेकिन इस मामले ने सभी को हैरान कर दिया।

रमदेई का पक्ष

रमदेई ने बताया कि 1990 से वह अपने भाई के पास रह रही हैं। उनके मुताबिक, गुरुप्रसाद ने न तो आर्थिक मदद दी और न ही कोई संपत्ति में हिस्सा दिया। रमदेई ने कहा, “मुझे कुछ समय तक ही गुजारा भत्ता मिला। अब बुढ़ापे में कोई सहारा नहीं है। मैं अपने भाई के भरोसे जी रही हूं।” रमदेई के भाई बालकराम ने भी आरोप लगाया कि गुरुप्रसाद के पास कई बीघा जमीन है, लेकिन उन्होंने रमदेई को कुछ भी नहीं दिया। बालकराम ने कहा कि वह जल्द ही गुजारा भत्ता के लिए फिर से न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

गुरुप्रसाद का पक्ष

दूसरी ओर, गुरुप्रसाद का कहना है कि उन्होंने कई बार रमदेई को साथ रहने के लिए कहा, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी दावा किया कि रमदेई के परिवार ने उनके खिलाफ गलत आरोप लगाए। गुरुप्रसाद ने कहा कि वह इस फैसले से दुखी हैं, लेकिन अब आगे बढ़ना चाहते हैं।

एक अनोखा मामला, जो समाज को सोचने पर मजबूर करता है

यह मामला न केवल लखनऊ बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। वैवाहिक रिश्तों की जटिलता और मर्यादाओं का उलंघन करना दर्शाता है। समाज में जहां रिश्तों को निभाने की बात की जाती है, वहीं यह घटना हमें यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि आपसी समझ और संवाद की कमी किस तरह रिश्तों को तोड़ सकती है। इस घटना से ना केवल महिलाओं एवं पुरुषों को सबक़ लेना चाहिये बल्कि विवाहिता के परिवार को भी सीखना चाहिये कि जिस लड़ाई को वह आगे बढ़ा रहे हैं उसका अंततः नतीजा बुरा भी हो सकता है जिसमें एक महिला की ज़िंदगी पूरी तरह से बर्बाद हो सकती है और वह बुढ़ापे में बेसहारा व लाचार हो सकती है।

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