नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में भारत एक ही वस्तु एवं सेवा कर (GST) दर की दिशा में आगे बढ़ेगा। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह कदम फिलहाल तुरंत उठाना संभव नहीं है।
सीतारमण ने कहा कि त्योहारी सीज़न में बढ़ती खपत से सरकार को इस वित्तीय वर्ष के राजस्व पर किसी नकारात्मक असर की आशंका नहीं है, भले ही GST दरों में हालिया कटौती की गई हो। उनका कहना है कि अब उनका ध्यान इस बात पर रहेगा कि यह रेट कटौती वास्तव में उपभोक्ताओं तक पहुंचे।
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि GST में किए गए बदलाव अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए शुल्कों के जवाब में नहीं हैं, लेकिन खपत बढ़ने से उसका असर कुछ हद तक संतुलित हो सकता है।
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर सुधार एक साथ
उन्होंने कहा कि नए आयकर विधेयक और GST दरों में सरलीकरण को मिलाकर देखा जाए तो यह कम समय में बड़ी उपलब्धि है। आमतौर पर ऐसे सुधारों को लागू करने में वर्षों लग जाते हैं।
सीतारमण ने बताया, “कोविड जैसी चुनौती का सामना करना और उससे बाहर निकलना भी कठिन था। लेकिन इन कर सुधारों को लागू करना हमारी टीम की मेहनत का नतीजा है। असली जीत तब होगी जब आम जनता को इन सुधारों से लाभ मिलेगा।”
राज्यों की चिंता और राजस्व का सवाल
GST दर घटाने पर राज्यों ने राजस्व में कमी की आशंका जताई थी। इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि सभी कर राजस्व एक ही कोष से आते हैं और दर घटाने से खपत बढ़ने पर अंततः आय भी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि फिलहाल अधिकांश वस्तुएं 0%, 5% और 18% के स्लैब में आ चुकी हैं और उपकर (cess) को भी समाप्त कर दिया गया है।
उद्योग और उपभोक्ताओं पर नज़र
सीतारमण ने साफ किया कि सरकार उद्योग जगत से लगातार संवाद कर रही है और अधिकतर कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि वे घटे हुए टैक्स का लाभ ग्राहकों को देंगे। उन्होंने कहा, “हम इस प्रक्रिया पर करीबी नज़र रखेंगे और यदि कहीं गड़बड़ी होती है तो कार्रवाई भी की जाएगी।”
आगे की राह…
उन्होंने बताया कि भविष्य में सुधार का अगला चरण गैर-वित्तीय नियामकों (जैसे प्रतियोगिता आयोग, खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण आदि) से जुड़ा होगा। साथ ही, विनिवेश (disinvestment) की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।
वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और देश जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा।
