भोपाल: मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मोहन यादव सरकार एक के बाद एक विवादों से जूझ रही है। प्रमुख कारणों में से एक है पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए प्रस्तावित 27% आरक्षण, जो कुल कोटे को 73% तक पहुंचा देगा। संवैधानिक प्रावधानों के तहत आरक्षण की सीमा 50% ही निर्धारित है, जिससे यह कदम कानूनी चुनौतियों से घिरा हुआ प्रतीत हो रहा है। दूसरी ओर, भगवान राम से जुड़ी कथित जातिवादी टिप्पणियां भी राजनीतिक तूफान खड़ा कर रही हैं, जिसने हिंदू समाज के एक वर्ग को नाराज कर दिया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बार-बार जोर देकर कहा है कि उनकी सरकार OBC समुदाय के हितों की दृढ़ता से रक्षा करेगी और सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से 14% से वृद्धि कर 27% आरक्षण सुनिश्चित करने का प्रयास जारी रखेगी। इस संदर्भ में, राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें महाजन आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। रिपोर्ट में वर्ण व्यवस्था पर चर्चा करते हुए कुछ विवादास्पद उदाहरण दिए गए हैं, जैसे:
- भगवान राम द्वारा शंबूक का वध, जो कथित रूप से उनकी निम्न जाति और वर्ण व्यवस्था के उल्लंघन के कारण किया गया।
- द्रोणाचार्य द्वारा एकलव्य का अंगूठा काट कर मांग लेना जो उसे शिक्षा से वंचित रखने का प्रयास था क्योंकि एकलव्य भील समुदाय से थे।
इन तर्कों के आधार पर रिपोर्ट में बहुजन और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया है। आलोचकों का मानना है कि BJP ने हिंदू धर्म के प्रतीकों का उपयोग सवर्ण वर्चस्व को बनाए रखने के लिए किया, जबकि वास्तव में OBC हितों को आगे बढ़ाने का दावा करते हुए सवर्ण समुदाय के साथ अन्याय किया जा रहा है। यदि मध्य प्रदेश में यह 73% आरक्षण लागू हो जाता है, तो अन्य राज्यों में भी इसी तरह के प्रयोग की आशंका व्यक्त की जा रही है, जो सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
देश के बुद्धिजीवी समुदाय ने इस विकास पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सामान्य वर्ग के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, और वे इसका कड़ा विरोध करेंगे। अधिवक्ता दीपिका शर्मा जैसे विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुद्दा न केवल आरक्षण नीति का है, बल्कि सामाजिक न्याय और धार्मिक संवेदनशीलता का भी। शुरुआत में BJP ने इन दावों को भ्रामक बताकर खारिज किया और रिपोर्ट को असत्यापित ठहराया। हालांकि, विरोध की तीव्रता बढ़ने पर पार्टी को स्वीकार करना पड़ा कि यह महाजन आयोग की रिपोर्ट ही है, जिसमें वर्ण व्यवस्था और भगवान राम पर आपत्तिजनक उल्लेख हैं। फिर भी, बुद्धिजीवी वर्ग इससे संतुष्ट नहीं है, क्योंकि सरकार ने इसी दस्तावेज का कोर्ट में पक्ष रखने के लिए उपयोग किया था।
सोशल मीडिया पर इस विवाद ने जोरदार रूप धारण कर लिया है, जहां हैशटैग #RamDrohiMohanYadav ट्रेंडिंग नंबर एक पर पहुंच गया है और वहीं हैशटैग #सामान्यवर्गभाजपाछोड़ो भी ट्रेंडिंग है। सवर्ण समुदाय में आक्रोश व्याप्त है, और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन की चेतावनी दी जा रही है। उच्चतम न्यायालय में 73% आरक्षण पर जल्द सुनवाई निर्धारित है, और यह देखना रोचक होगा कि क्या BJP OBC को वांछित 27% कोटा दिला पाती है या यह विवाद समय के साथ और गहरा होगा। यह मामला न केवल मध्य प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पूरे देश में आरक्षण बहस को नई दिशा दे सकता है। देखना यह है कि सरकार का अगला कदम क्या होगा और जनता की प्रतिक्रिया उस पर क्या होगी।
