क़तर : दोहा पर इज़राइली हमले ने पूरे अरब जगत को झकझोर दिया है। मंगलवार को हमास नेताओं की मौजूदगी में हुए इस हमले में सात लोगों की मौत हुई, जबकि क़तर ने पुष्टि की कि उसके दो सुरक्षा अधिकारी भी मारे गए। हमले के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे “अस्वीकार्य” बताते हुए क़तर की संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति समर्थन दोहराया।
इसी बीच, क़तर के प्रधानमंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” करार दिया। उन्होंने कहा कि “इज़राइल ने शांति की किसी भी संभावना को खत्म कर दिया है और प्रधानमंत्री नेतन्याहू को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में जवाबदेह ठहराना होगा।”
ग़ौरतलब है कि मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई युद्धविराम योजना पर चर्चा कर रहे हमास नेताओं को निशाना बनाया गया। हालांकि संगठन ने दावा किया कि उसका नेतृत्व हमले से सुरक्षित बच निकला। इसके बावजूद नेतन्याहू ने क़तर को खुली धमकी दी – “अगर आप आतंकियों को शरण देंगे तो अगला वार फिर आप पर होगा।”
अरब जगत ने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराज़गी जताई है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बुधवार को कहा, “हम क़तर के साथ बिना शर्त खड़े हैं और इस तरह की बर्बर कार्रवाई को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।” वहीं, कुवैत और जॉर्डन के युवराज, और यूएई के राष्ट्रपति शेख़ मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नहयान भी दोहा पहुंचे और इज़राइली हमले को “अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन” बताया।
लेबनान के हिज़्बुल्लाह नेता नैम क़ासिम ने चेतावनी दी कि “तेल-समृद्ध खाड़ी देश यह न समझें कि वे सुरक्षित हैं। क़तर पर हमला साफ़ इशारा है कि भविष्य में कोई भी निशाने से बाहर नहीं रहेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल का मक़सद “ग्रेटर इज़राइल” नामक विस्तारवादी योजना को आगे बढ़ाना है, जिसमें फ़िलिस्तीन से लेकर लेबनान, सीरिया और जॉर्डन तक के इलाक़ों पर दावा किया जाता है।
क़तर सरकार ने एक बयान में कहा कि “हमास कार्यालय की मेज़बानी अमेरिका और इज़राइल के अनुरोध पर मध्यस्थता प्रक्रिया के तहत की गई थी। नेतन्याहू का यह आरोप कि क़तर आतंकियों को पनाह दे रहा है, पूरी तरह झूठा और निंदनीय है।”
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह हमला उनका फैसला नहीं था बल्कि पूरी तरह नेतन्याहू की कार्रवाई थी। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिका-इज़राइल रिश्तों में दरार भी आ सकती है।
ग़ौर करने वाली बात है कि इज़राइल ने सिर्फ़ 72 घंटों में छह अलग-अलग देशों पर हमले किए हैं और यमन में बुधवार को 35 लोगों को मार गिराया। वहीं, ग़ज़ा में ताज़ा बमबारी में 72 और फ़िलिस्तीनियों की मौत हुई, जिससे कुल मृतकों का आंकड़ा 64,000 के पार पहुँच चुका है।
