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Wednesday, February 25, 2026

उत्तर प्रदेश में मॉनसून का कहर: जनजीवन अस्त-व्यस्त, नदियों का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा संकट

उत्तर प्रदेश: प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रविवार से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने सामान्य जीवन को पूरी तरह से ठप कर दिया है। भारी वर्षा और इससे जुड़े हादसों ने पूरे राज्य में तबाही मचाई है, जिसमें 14 लोगों की जान चली गई। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में कई जिलों में भारी से अत्यधिक बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।

बारिश से हादसों का दौर

पिछले कुछ दिनों की बारिश ने कई जिलों में कहर बरपाया है। मेरठ और मुरादाबाद में बिजली गिरने से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि प्रयागराज, बहराइच और गोंडा में बारिश से संबंधित हादसों में सात अन्य लोगों ने अपनी जान गंवाई। अलीगढ़, एटा, कासगंज, मुरादाबाद और पीलीभीत में भारी जलभराव के कारण प्रशासन को 12वीं कक्षा तक के स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा।

रिकॉर्ड तोड़ बारिश

मॉनसून की ट्रफ लाइन और एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण कई जिलों में रिकॉर्डतोड़ बारिश दर्ज की गई। अमेठी के फुरसतगंज में 171.3 मिमी, अलीगढ़ में 153.4 मिमी और संभल में 146 मिमी बारिश हुई। बरेली, मेरठ के सरधना, कासगंज के पटियाली और बरेली के आंवला में भी 125 मिमी तक वर्षा दर्ज की गई। अलीगढ़ में एक दिन में 44 मिमी बारिश ने पिछले दस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। लखनऊ में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने सोमवार सुबह तक 53 मिमी वर्षा दर्ज की, जिसके कारण दिन का तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस गिरकर 29.1 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।

अलीगढ़ और मुरादाबाद में जलप्रलय

अलीगढ़ में सितंबर के पहले दिन हुई भारी बारिश ने शहर को जलमग्न कर दिया। रामघाट रोड पर सैकड़ों दुकानों में पानी घुस गया, और सड़कों पर नाव चलाने की नौबत आ गई। मुरादाबाद में लगातार बारिश से चार लोगों की डूबने से मौत हो गई, और जलभराव के कारण रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। एक दर्जन से अधिक ट्रेनें अपने समय से देरी से चलीं।

पीलीभीत और मथुरा में फसलों का नुकसान

पीलीभीत में खेतों में पानी भरने से फसलें पूरी तरह डूब गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। मथुरा में झमाझम बारिश ने शहर के कई हिस्सों को तालाब में बदल दिया। यमुना नदी का बढ़ता जलस्तर मथुरा और आगरा के लिए नई चुनौती बन गया है। सहारनपुर के हथिनीकुंड बैराज से 3.39 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे तटवर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है। अनुमान है कि अगले 50 घंटों में 3.11 लाख क्यूसेक पानी मथुरा पहुंचेगा, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

फर्रुखाबाद में गंगा का खतरा

फर्रुखाबाद में गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिसके कारण गंगापार के एक दर्जन से अधिक गांव टापू बन गए हैं। ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव और स्टीमर का सहारा लेना पड़ रहा है। नदी के कटान से ठठा की मड़ैया और डॉली की मड़ैया जैसे गांवों का अस्तित्व संकट में है।

प्रयागराज में राहत, लेकिन चुनौतियां बरकरार

प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन कमी की गति बेहद धीमी है। कानपुर बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण कछारी इलाके अभी भी जलमग्न हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भारी से अत्यधिक बारिश की चेतावनी दी है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। साथ ही, नदियों के किनारे बसे गांवों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

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